बुद्ध



मेरा सन्देश है: गौतम बुद्ध को समझने की कोशिश करो। वे सबसे सुन्दर लोगों में से हैं जिन्होंने इस धरती पर कदम रखा।

ऐच.जी वेल्स, ने अपने विश्व इतिहास में एक वाक्य लिखा है जो कि स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाने योग्य है। गौतम बुद्ध के बारे में लिखते हुए वह कहता है, “शायद गौतम बुद्ध ही सिर्फ ऐसे नास्तिक व्यक्ति है जो फिर भी बहुत ईश्वर स्वरूप है।”
उस प्रकाश में, उस संबोधि, और निर्वाण के क्षण में, उन्हें किसी भगवान के दर्शन नहीं हुए। सम्पूर्ण आस्तित्व दिव्य है; वहां अलग से कोई निर्माता नहीं है। पूरा आस्तित्व ही प्रकाश से ओत-प्रोत है, चेतना से ओत-प्रोत; इसलिए कोई भगवान नहीं है वरन वहां भगवत्ता है।

यह धार्मिक जगत में एक क्रान्ति है। बुद्ध ने भगवान-रहित धर्म का निर्माण किया। पहली बार भगवान धर्म का केंद्र नहीं है। मनुष्य, धर्म का केंद्र बन गया है, और मनुष्य का अंतरतम भगवत्ता हो गया है, जिसके लिए तुम्हे कहीं नहीं जाना है–तुमने केवल बाहर जाना बंद कर दिया। कुछ क्षणों के लिए अपने भीतर रहो। धीरे-धीरे अपने केंद्र में स्थिर होते हुए। जिस दिन तुम अपने केंद्र पर स्थिर हुए कि विस्फोट हो जाता है।

तो मेरा सन्देश है: गौतम बुद्ध को समझो, ना कि बौद्ध बन जाओ। उनका अनुसरण मत करो। उस समझ को अपनी प्रज्ञा द्वारा आत्मसात करो, बल्कि उसे अपना बन जाने दो। जिस क्षण भी वो तुम्हारी अपनी हो जाती है, वह तुम्हे रूपांतरित करने लगती है। तब तक वह गौतम बुद्ध की रही है, और उसमे पच्चीस सदियों का अंतर है। तुम बुद्ध के शब्दों को दोहराये चले जा सकते हो–वे सूंदर हैं परंतु वे तुम्हें उसको पाने में मदद ना कर सकेंगे जिसकी खोज में तुम हो।

~ ओशो
The Sword and the Lotus, Talk #11

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