बुद्ध

बुद्ध

भारत इस सरल से कारण के लिए गौतम बुद्ध को समझ नहीं पाया : वह समझता है कि मौन बैठना, बस होना मात्र कोई मूल्य नहीं रखता। तुम्हें कुछ करना होगा, तुम्हें प्रार्थना करनी होगी, तुम्हें मन्त्रजाप करने होंगे। तुम्हें किसी मंदिर में जा कर इंसान के ही बनाये हुए भगवान की पूजा करनी होगी। “तुम शांत बैठे-बैठे क्या कर रहे हो?”

और गौतम बुद्ध का सबसे बड़ा योगदान यह है कि : तुम अपनी शाश्वतता, अपनी लौकिक सत्ता को प्राप्त कर सकते हो अगर तुम बिना किसी उद्देश्य के, बिना किसी इच्छा के, और बिना किसी लालसा के शांत बैठ सको, बस अपने होने का आनंद लेते हुए–उस खाली अंतराल में जहां सहस्त्र कमल खिल उठते हैं।

गौतम बुद्ध अपने आप में एक श्रेणी है। सिर्फ कुछ ही लोगों ने उनको समझा है। यहां तक कि उन देशों में जहां बौद्ध धर्म एक राष्ट्रीय धर्म है–थाईलैंड, जापान, ताइवान–में यह एक बौद्धिक दर्शन बन गया है। झाजेन, मनुष्य का मौलिक योगदान–मिट गया है।

शायद तुम लोग ही केवल हो जो गौतम बुद्ध के निकटतम समकालीन हो। इस मौन में, इस शून्य में, इस मन से अ-मन की छलांग में, तुम एक अलग ही शून्य में प्रवेश कर जाते हो जो कि ना बाहर का है ना ही भीतर का। बल्कि दोनों के पार है।

~ ओशो
Zen: The Quantum Leap From Mind to No-Mind , Talk #9

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